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Heavy Downpour in Mumbai: IMD Ne Issue Kiya Orange Alert:मुंबई में भारी बारिश: आईएमडी ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

Heavy Downpour in Mumbai: IMD Ne Issue Kiya Orange Alert:मुंबई में भारी बारिश: आईएमडी ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

Heavy Downpour in Mumbai: IMD Ne Issue Kiya Orange

 Alert:मुंबई में भारी बारिश: आईएमडी ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

 

Mumbai, June 24, 2026 — मुंबई की गलियों, सड़कों और स्थानीय इलाकों को बुरी तरह से पानी में डूबोते हुए, एक जोरदार बारिश ने पूरे शहर में तहलका मचा दिया। मुंबई में मंगलवार की रात से ही लगातार बारिश हो रही थी। पूरी रात भर आसमान से पानी बरसा। बुधवार की सुबह, 24 जून, 2026, जब लोग उठे, तो उन्होंने देखा कि उनका शहर पानी में डूब गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मुंबई की स्थिति को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। आईएमडी ने कहा है कि आने वाले दो दिन में बारिश और तेज़ होगी। लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लोकल ट्रेनें, सड़क यातायात, और दैनिक जीवन पूरी तरह से परेशान हो गया है।


बारिश ने पूरी रात शहर को घेर लिया

23 जून, मंगलवार की रात, आसमान से अचानक पानी गिरना शुरू हुआ। वैसे तो मानसून का मौसम आता है हाय हर साल। इस बार मानसून ने पहली बारिश में ही अपनी ताकत दिखा दी। कुछ इलाकों में 200 मिमी से ज्यादा बारिश हो गई। कुछ जगह में 300 मिमी बारिश का रिकॉर्ड बन गया। 300 मिमी बारिश एक काफी बड़ी मात्रा है। आप सोचिए कि आपके घर की चैट ऊपर 300 मिमी पानी के बारे में बात करने का मतलब है। मुंबई मौसम कार्यालय ने इस बारिश को काफी गंभीर माना।


बुधवार सुबह जब ऑफिस जाने वाले लोग तैयार हो गए, तो रोड पर उनको बहुत पानी दिखा। अंधेरी, दादर, सायन, कुर्ला, वडाला, माटुंगा और दक्षिण मुंबई में जलभराव का बुरा हाल था। निचले इलाकों का तो हाल काफी खराब था। घरो में पानी घुस गया. कुछ सड़कें पानी के नीचे चली गईं। लोगों को ऐसे जगह से निकलने में भी समस्या हुई। पूरा शहर एक झील की तरह दिखने लगा। इसीलिये लोगों में घबराहट का माहौल बन गया।



IMD ने ऑरेंज अलर्ट क्यों जारी किया?
IMD ने ऑरेंज अलर्ट क्यों जारी किया?

भारत मौसम विज्ञान विभाग, यानी आईएमडी, ये बात के बारे में बड़ा अलर्ट है। आईएमडी मौसम पैटर्न को दैनिक ट्रैक करता है। जब उसने देखा कि बारिश का पैटर्न खतरनाक हो रहा है, तो उसने ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया। ऑरेंज अलर्ट एक गंभीर चेतावनी होती है। इसका मतलब यह है कि भारी बारिश की वजह से जीवन और संपत्ति को खतरा हो सकता है। आईएमडी ने कहा कि अगले 24 से 48 घंटे में भी मुंबई में भारी बारिश के आसार बने हुए हैं।


आईएमडी के अधिकारियों ने बताया कि मानसून के बादल एक निम्न दबाव प्रणाली के साथ चल रहे हैं। ये सिस्टम महाराष्ट्र के तटों को काफी प्रभावित कर रहा है। क्या वजह है कि मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और रायगढ़ जिले में भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने कहा कि लोग घर से बाहर निकलें सिर्फ जब बहुत जरूरी हो। स्कूलों को भी एडवाइजरी दी गई है कि जरूरी हो तो वे बंद कर सकते हैं। मछुआरों को भी कहा गया है कि वो गहरे समुद्र में न जाएं। समुद्र का काफी उबड़-खाबड़ होने की वजह से ये बात कही गई।


ट्रैफ़िक का बुरा हाल: सड़क और ट्रेन दोनों प्रभावित

बुधवार की सुबह पीक आवर्स में मुंबई का ट्रैफिक तो पूरी तरह से जाम हो गया। अंधेरी सबवे को बंद करना पड़ा। ये सबवे बारिश में सबसे पहले पानी से भर जाती है। इस बार भी वही हुआ. ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे दोनों पर गाड़ियों की लंबी लाइन लग गई। स्थानीय सड़कों पर आधी घंटी बस दो-दो किलोमीटर पार करने में लग गई। ऑटो-रिक्शा चालकों ने भी रेट बढ़ा दिया। मीटर के बावज़ूद लोग से ज़्यादा पैसे माँगने लगे। यात्रियों की परेशानी और भी बढ़ गई।


लोकल ट्रेन मुंबई की जान कहलते हैं। मुंबई का लोकल ट्रेन नेटवर्क भी बारिश से प्रभावित हुआ है। सेंट्रल लाइन, वेस्टर्न लाइन और हार्बर लाइन पर ट्रेनों की स्पीड घट गई है। पानी ट्रैक पर जबने के कारण तेज ट्रेनों को चलाना खतरनाक हो सकता है। इसलिए मोटरमैन को कहा गया कि वो धीमी गति से ट्रेन चलाएं। कुछ जगह पर मतलब 20 मिनट की यात्रा 2 घंटे लग रहा था। दादर स्टेशन पर भारी भीड़ दिखने को मिली. लोगों को प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ रहा था। कुछ ट्रेनें स्किप भी हुई हैं. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और चर्चगेट डोनो पर घोषणा की जाएगी कि यात्री अपनी सुरक्षा का ख्याल रखेंगे।


जलभराव ने घरों में पानी घुस दिया

मुंबई के काई चॉल, स्लम एरिया और निचले इलाकों में पानी एक फुट से ऊपर जा गया। दादर के शिव सेना भवन के पास पानी का स्तर बहुत ऊपर चला गया। माटुंगा और सायन में कुछ इमारतों में पानी ग्राउंड फ्लोर में एंटर कर गया। घर वाले अपना सामान ऊपरी मंजिल पर रखें। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों को स्विच ऑफ करना पड़ा। लोगन ने बीएमसी हेल्पलाइन पर फोन किया। भारतीय नगर सेवा नगर निगम, यानी बीएमसी, ने अपनी आपदा प्रबंधन टीमें तैयार रखी हैं। बीएमसी ने कहा कि उनके पंप पानी निकालने के काम में लगे हुए हैं। लेकिन बारिश इतनी तेज़ हो रही थी कि कहीं पंपों पर भी पानी नहीं जा रहा था।


छोड़े गए मैनहोल, और कचरा ड्रेनेज सिस्टम को ब्लॉक कर दिया गया था। क्या वजह से पानी पूरा तरह से रुका हुआ लग रहा था। बीएमसी कमिश्नर ने मीडिया को कहा कि उनकी टीमें नालियां साफ करने के काम में लगी हैं। सत्तारूढ़ शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंदे ने मेयर से अनुरोध किया कि नाली की सफाई और सूखा कचरा हटाने के काम में और तेजी से काम किया जाए। नेता ने कहा कि ऐसी ही हर साल ये समस्या होती है, इसलिए स्थायी समाधान चाहिए। विपक्षी दलों ने भी बीएमसी की कमी है ये चीज बढ़ा दी है।


हवाई यात्रा भी बाधित हुई।

छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो मुंबई का मुख्य हवाई अड्डा है, वहाँ भी समस्याएँ दिखेंगी। भारी बारिश के कारण उड़ानों की लैंडिंग में देरी हो गई। विजिबिलिटी काफी कम हो गई थी. पायलट साफ तरह से रनवे नहीं देख पा रहे थे। कुछ घरेलू उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी प्रभावित हुईं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यात्रियों को मैसेज किया कि जो भी लोग मुंबई आने वाले हैं, वो अपनी फ्लाइट का शेड्यूल चेक करें। वेटिंग हॉल में लोगों को बैठने की जगह नहीं मिल रही थी। बारिश के कारण से टेकऑफ़ भी टाइम से नहीं हो पा रहा था। लोगों को अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट मिस करने का डर हो रहा था।


स्वास्थ्य और सुरक्षा के खतरे बढ़ गए

जब बारिश का पानी रोड पर जमा होता है, तो उसमें स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ड्रेनेज का पानी गंदा होता है। इसके साथ आने वाले बैक्टीरिया से मलेरिया, डेंगू और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियाँ विफल हो जाती हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि पानी में ना जाएं, खासकर जिसका गंदा पानी जमा हो। पानी से भरा हुआ एरिया जो बिजली पोल के पास हो, वहां बिल्कुल न जाएं। क्योंकि बिजली के तारों से पानी का कनेक्शन काफी खतरनाक हो सकता है। ये छोटे छोटे टिप्स भी लोगों को अपने सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।


स्कूलों के प्रशासकों ने सर्कुलर भेजा है अभिभावकों को। उन्हें कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजने से पहले मौसम की स्थिति देखें। कुछ स्कूलों ने बुधवार को ऑफ डिक्लेयर कर दिया। ऑनलाइन कक्षाओं को भी वापस से शुरू किया गया। ये एक अस्थायी उपाय है. लेकिन बारिश के खतरे को देखते हुए, ये कदम जरूरी लग रहे हैं।


मौसम विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं

मौसम विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं


मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि ये भारी बारिश मानसून प्रणाली के सामान्य रूप से अपेक्षित पैटर्न में है। लेकिन इस बार बारिश की तीव्रता कुछ ज़्यादा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 का ये पहला प्रमुख वर्षा मंत्र है। जलवायु परिवर्तन को भी एक कारक माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने ये बात कही कि शहरों में चरम मौसम की घटनाएं अब लगातार होती जा रही हैं। शहरी बाढ़ की समस्या एक वैश्विक मुद्दा बन रही है। मुंबई की जनसंख्या भी बहुत ज़्यादा है। कंक्रीट की सतहें भी इतनी ज़्यादा हैं कि पानी अवशोषित नहीं होता। ये सब बातें एक साथ आके शहर को बाढ़ की स्थिति में ला देती हैं।


आगे क्या करना चाहिए?

महाराष्ट्र सरकार ने आपदा राहत कोष को तैयार रखा है। सीएम ऑफिस ने कहा कि जो भी लोगों को मदद चाहिए, वो बीएमसी हेल्पलाइन पर कॉल करें। मुंबई पुलिस भी अलर्ट मोड में है. ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी हर प्रमुख जंक्शन पर बारिश के कारण से घंटे-घंटे खड़े रह कर ट्रैफिक प्रबंधन करें। ये लोगों का बहुत बड़ा मदद कर रहे हैं। बीएमसी के इंजीनियर नालों की निगरानी कर रहे हैं। टीएमसी, नवी मुंबई, ठाणे में भी ऐसी ही समस्याएं दिख रही हैं। इसलिए ये बारिश सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है। ये पूरा मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन को कवर कर रही है।


लोगों से अपील की गई है कि समाचार चैनल, रेडियो और आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपडेट देखते रहें। आईएमडी का पूर्वानुमान काफी महत्वपूर्ण है। अगर रेड अलर्ट अगले लेवल पर दिया जाता है, तो और भी सख्त प्रतिबंध आ सकते हैं। लोगो को पैंट्री में और जरूरी सामान रखना चाहिए। आपातकालीन चिकित्सा किट, टॉर्च, और चार्ज किया गया पावर बैंक सबके पास होना चाहिए। बारिश के सीज़न में ये छोटी-छोटी तैयारियां काफी काम आती हैं।


अंतिम अपडेट: अब भी ख़तमा नहीं हुआ


लोगों को गले मिलकर, सहयोग से, और धैर्य के साथ मुश्किल वक्त से गुज़रने की ज़रूरत है। बारिश के बाद शहर फिर से अपने आप को संभालेगा। लेकिन तब तक सतर्क, जागरूक और सुरक्षित रहना हर एक मुंबई वाले का काम है। मानसून का मौसम है, मुंबई की स्पिरिट एक बार फिर टेस्ट में है। और जैसे हर बार, मुंबई ये टेस्ट भी पास कर ही लेगी।

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